Saturday, April 15, 2017

मै अल्फ़ाज़ लिखते लिखते खुद एक अल्फ़ाज़ बन गया

ज़िन्दगी की राहो में चलते चलते 
ज़िन्दगी की राहो का फकीर बन गया 
मै अल्फ़ाज़ लिखते लिखते 
खुद एक अल्फ़ाज़ बन गया 
आया था इस दुनिया में 
खुद की कायनाथ बनाने 
कायनाथ तो बना ना सका 
कायनाथ बनाते बनाते में 
खुद एक कायर बन गया 
मै अल्फ़ाज़ लिखते लिखते लोगो 
खुद एक अल्फ़ाज़ बन गया 
सोचता था मै इस दुनिया में 
किसी को दुःख ना दिया करू 
पर मेरी यह अदा दुनिया को 
अच्छी नहीं लगी 
दूसरो को खुशियाँ देते देते 
में खुद एक दुःखी इंसान बन गया 
मै अल्फ़ाज़ लिखते लिखते 
खुद एक अल्फ़ाज़ बन गया 
सोचता था मै ज़िन्दगी को 
दूसरो के लिए जिया करू 
दूसरो के हर दर्द में उनका 
साथ दिया करू 
पर जब मुझे दर्द आया 
तो किसी ने मेरा' साथ नहीं दिया 
दूसरो का दर्द बनते बनते मै 
खुद एक अकेला परिंदा बन 
कर रह गया 
मै अल्फ़ाज़ लिखते लिखते 
खुद एक अल्फ़ाज़ बन गया 
जीना ओर मरना इस दुनिया के 
दो पहलू है 
मै भी आया हूँ ओर एक 
दिन मुझे भी दुनिया से जाना हैं 
ओर एक दिन ऐसा आएगा 
कयनाथ में की मै इस दुनिया 
से कही दूर चला जायगा 
तब मेरा नाम भी एक अल्फाज बन जायेगा 
ओर में बस इतना कहुगा 
मै अल्फ़ाज़ लिखते लिखते 
खुद एक अल्फ़ाज़ बन गया

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