Saturday, June 24, 2017
एक सितारा मिल गया
चाँद की चाहत में निकले थे
एक सितारा मिल गया ,
दिल-ए -दर्द को समझने
वाला सहारा मिल गया।
गुजती थी आबाजे उसके
नाम की कॉलेज की गलियों में ,
ऐसे जैसे खुशुबू मिल रही हो
हवा के रंगो के साथ।
लहराने लगती जुल्फें उसकी
जब आती कॉलेज में ,
hello,hey,good morning,
कहकर सबका मन बहलाती थी।
कभी कभी यही गुस्सा हो
जाती थी मेरी बातों में ,
फिर sorry बोल कर
मेरे नादान से दिल को बहलाती थी।
खामोश सी हो गए थी
कुछ पलों के लिए यही ,
लगता था ज़िन्दगी में
कही खो सी गए थी ,
कुछ पाने की चाहत थी ,
या कोई उम्मीद सी टूटी थी ,
भीगती रहती थी वह
बारिश की बूंदो में,
मज़ा करना चाहती थी
उन बूंदो का ,
या गम के आँचल की
दिल से बहलाना चाहती थी।
हसकर बात करती थी
अपने दिल की सबसे ,
मानो कुछ तारें मिल
कर अपना घर बना रहे हो।
देख कर उसको पता चला
कि ज़िन्दगी क्या है ,
खुश रहती थी वह
दूसरों को खुश देखकर।
उसकी वाणी में ऐसी मिठास थी ,
जैसे पानी बहता हो नदियों में।
गम तो था उसकी ज़िन्दगी में ,
पर खामोश रहना अच्छा लगता था उसके।
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