Saturday, April 1, 2017
बिख गए वो ख़ाब (shayari in hindi)
बिखर गए वो ख़ाब,
जिन्हें में हकीकत में सजता था।
कुछ को अपना समझता था कुछ को साथी।
ज़िन्दगी की भीड़ में ऐसी ठोकर लगी,
अपने लोगो से उलझ कर
ज़िन्दगी गुमनाम से बन गए हैंं।
सपनों को सजाते सजाते,
खाबों को बिखरता देखता रहा।
हासिल कुछ नहीं हुआ उससे,
बस आँसू की बरसात हुई आँखों से।
दिल की गहराईयों में चमकते
खाबोंं को तरासते रहे,
दिमाग में चलती हकीकतों की
हलचलों को लोगो से छुपाते रहे।
बिखरे बिखरे से खाब लगने लगे,
अपनो में वो प्यार खोजने लगे
जो निकलता था कभी दिलों से।
खोजना चाहता हूँ अब भी उन खाबों को,
पर अब खाबों के टूटनें का डर नही लगता।
टूट सा गया हूँ इस दुनिया की भीड़ में,
मुझे कुछ नही आता किस किस को अपना
समझा कर एतबार करूँ।
यादों में हर कोई रुलाता हैं,
कोशिश करता हूँ उन सपनों को जोड़ने की
पर अक्सर वो टुटतेंं नज़र आते हैं।
कोई किसी का नहीं होता,
मैंने भी दुनिया में आकर लोगों को देख लिया।
सब अपने अपने मतलब के लिए दुनिया में जीतें है।
खाबों का क्या हैं वो तो खिलते रहेंगे,बिखरते रहेंगे।
क्या करूँ क्या ना करूँ लोगों ने,
खुद को इतना कमजोर बना लिया हैं लोगो.ने
जीनेंं का मतलब भूल गए हैं।
आपने सपनों के टुटने की सजा
अपने शरीर को देते हैं।
आँसुओंं में आँखों को खोजना चाहते हैं,
दिल में गमों को छुपाते हैं।
क्यों करते हो वो दोस्ती जो निभा ना सको,
देकर धोका क्यों अपने दोस्तों को रुँँलाते हो।
जो करना है वो करो मुझे नहीं पता
हम तो बस दुआऐं ही दे सकते हैं
बहुत कुछ सोचना था,
बहुत कुछ पाना था,
बहुत कुछ खोजना था,
दोस्तों से
दोस्तों को हम नहीं समझ सके ।
दिल मेें वो प्यार पा ना सके।
ज़िन्दगी के सफर में वो खाब सजा ना सके,
आगे ले जाने का मन था उन,
बातोंं को जो अच्छी लगती थी।
पर अब लगता हैं वो खाब कही
बिखर सी गए है,
अब मेरे पास वो लब्ज नही है,
जो उन खाबो को सजता रहूँ।
हासिल कुछ नहीं हुआ उससे,
बस आँसू की बरसात हुई आँखों से।
दिल की गहराईयों में चमकते
खाबोंं को तरासते रहे,
दिमाग में चलती हकीकतों की
हलचलों को लोगो से छुपाते रहे।
बिखरे बिखरे से खाब लगने लगे,
अपनो में वो प्यार खोजने लगे
जो निकलता था कभी दिलों से।
खोजना चाहता हूँ अब भी उन खाबों को,
पर अब खाबों के टूटनें का डर नही लगता।
टूट सा गया हूँ इस दुनिया की भीड़ में,
मुझे कुछ नही आता किस किस को अपना
समझा कर एतबार करूँ।
यादों में हर कोई रुलाता हैं,
कोशिश करता हूँ उन सपनों को जोड़ने की
पर अक्सर वो टुटतेंं नज़र आते हैं।
कोई किसी का नहीं होता,
मैंने भी दुनिया में आकर लोगों को देख लिया।
सब अपने अपने मतलब के लिए दुनिया में जीतें है।
खाबों का क्या हैं वो तो खिलते रहेंगे,बिखरते रहेंगे।
क्या करूँ क्या ना करूँ लोगों ने,
खुद को इतना कमजोर बना लिया हैं लोगो.ने
जीनेंं का मतलब भूल गए हैं।
आपने सपनों के टुटने की सजा
अपने शरीर को देते हैं।
आँसुओंं में आँखों को खोजना चाहते हैं,
दिल में गमों को छुपाते हैं।
क्यों करते हो वो दोस्ती जो निभा ना सको,
देकर धोका क्यों अपने दोस्तों को रुँँलाते हो।
जो करना है वो करो मुझे नहीं पता
हम तो बस दुआऐं ही दे सकते हैं
बहुत कुछ सोचना था,
बहुत कुछ पाना था,
बहुत कुछ खोजना था,
दोस्तों से
दोस्तों को हम नहीं समझ सके ।
दिल मेें वो प्यार पा ना सके।
ज़िन्दगी के सफर में वो खाब सजा ना सके,
आगे ले जाने का मन था उन,
बातोंं को जो अच्छी लगती थी।
पर अब लगता हैं वो खाब कही
बिखर सी गए है,
अब मेरे पास वो लब्ज नही है,
जो उन खाबो को सजता रहूँ।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
/>
kdkkkkkkkkkkkkk bro
ReplyDelete